राजू को मिला सोने क भरा मटका

 एक समय की बात है, एक दूरदराज के गाँव में, जहाँ मिट्टी के घर और हरे भरे खेत थे, एक गरीब लड़का रहता था जिसका नाम राजू था। राजू के परिवार के पास मुश्किल से दो वक्त की रोटी भी नहीं होती थी। वह अक्सर अपने खाली पेट को सहलाते हुए तारों भरी रात में सोता था और एक बेहतर जीवन का सपना देखता था।


एक दिन, जब सूरज अपने चरम पर था और गाँव के लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, राजू पास के जंगल में लकड़ी इकट्ठा करने गया। वह हर दिन यही काम करता था, लेकिन आज कुछ अलग लग रहा था। हवा में एक अजीब सी फुसफुसाहट थी, जैसे पेड़ उसे किसी रहस्य की ओर बुला रहे हों।


राजू जंगल में और अंदर चला गया, जहाँ पेड़ों की छाया गहरी थी और सूरज की किरणें मुश्किल से ही ज़मीन तक पहुँच पाती थीं। अचानक, उसकी नज़र एक अजीबगहरी थी और सूरज की किरणें मुश्किल से ही ज़मीन तक पहुँच पाती थीं। अचानक, उसकी नज़र एव ॥ ब चमक पर पड़ी। वह चमक एक घनी झाड़ी के पीछे से आ रही थी। जिज्ञासा से भरकर, राजू झाड़ी के पास गया और पत्तों को हटाकर देखा।


वहाँ, ज़मीन में आधा गड़ा हुआ, एक बड़ा सा सोने का मटका पड़ा था। मटका इतना बड़ा था कि राजू के दोनों हाथ भी उस पर ठीक से नहीं आ पाते थे। उस पर प्राचीन नक्काशी थी जो सूरज की रोशनी में चमक रही थी। राजू ने अपने हाथों से मिट्टी हटाई और मटके को बाहर निकालने की कोशिश की। यह बहुत भारी था, लेकिन उसके अंदर एक अजीब सी ताकत आ गई थी।


आखिरकार, राजू ने मटके को ज़मीन से बाहर निकाला। उसने धीरे से उसका ढक्कन उठाया और देखा कि मटका सोने के सिक्कों और कीमती गहनों से भरा था। उसकी आँखें चमक उठीं, और उसका दिल खुशी से उछल पड़ा। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह सब सच था। उसने कभी सपने में भी इतनी दौलत नहीं देखीथी


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